Home दूसरी ख़बरें “चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से अलग रुख अपनाते हैं”: MEA

“चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से अलग रुख अपनाते हैं”: MEA

https://hindi.newsgate.press/
Photo copyright: Vineet Dikshit

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को दोहराया कि भारत और चीन सीमा से जुड़े मुद्दों को स्थापित राजनयिक और सैन्य तंत्रों के माध्यम से सुलझाने की प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं।

https://hindi.newsgate.press/
Photo copyright: Vineet Dikshit

यह बयान उस समय आया है जब अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ आमने-सामने की घटनाओं को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर की कथित टिप्पणियों की खबरें सामने आई हैं।

विदेश मंत्रालय के द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब में आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तब तनाव की स्थिति बन सकती है, जब चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से हटकर गतिविधियां करते हैं।

हालांकि, दोनों पक्ष किसी भी प्रकार के तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए संस्थागत तंत्रों के माध्यम से लगातार संपर्क में बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, “जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में समय-समय पर स्थिति तब प्रभावित होती है जब चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से अलग रुख अपनाते हैं।”

https://hindi.newsgate.press/
Photo copyright: Vineet Dikshit

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि भारत और चीन लंबित मुद्दों के समाधान तथा एलएसी पर किसी भी गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य संवाद तंत्रों का उपयोग कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एलएसी के कुछ क्षेत्रों में आपसी समझ बढ़ाने संबंधी उपायों पर चर्चा करने पर सहमत हुए हैं।

विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों एशियाई पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब अरुणाचल प्रदेश में पीएलए के साथ जारी आमने-सामने की घटनाओं को लेकर आईटीबीपी प्रमुख की कथित टिप्पणियों के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीमा की स्थिति को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अधिक पारदर्शिता की मांग की।

चीनी घुसपैठ और हाल के सैन्य-स्तरीय संवादों से जुड़ी रिपोर्टों का हवाला देते हुए खड़गे ने पूछा कि क्या कुछ क्षेत्रों में भारत की गश्त पहुंच प्रभावित हुई है।

उन्होंने सरकार से इस विषय पर संसद के समक्ष पूरी तस्वीर रखने की मांग भी की।

उन्होंने वर्ष 2020 के बाद भारत और चीन के बीच हुई विभिन्न राजनयिक पहलों के परिणामों पर भी सवाल उठाए।

इनमें विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) की वार्ताएं, वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की बैठकें तथा दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बातचीत शामिल हैं।

एलएसी पर वर्षों से चले आ रहे सैन्य तनाव के बाद संबंधों को स्थिर बनाने के लिए नई दिल्ली और बीजिंग के प्रयासों के बीच यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं दौर की वार्ता 25 अगस्त को बीजिंग में आयोजित हुई थी।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संबंधों के संतुलित और स्थिर विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी।

दोनों देशों ने लंबे समय से लंबित सीमा विवाद के समाधान के लिए एक ढांचागत समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

साथ ही, यह सहमति व्यक्त की कि जमीनी स्तर पर उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति का समाधान स्थापित राजनयिक और सैन्य संवाद तंत्रों के माध्यम से किया जाएगा, जिनमें स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और डब्ल्यूएमसीसी तंत्र शामिल हैं।

https://hindi.newsgate.press/
Photo copyright – Vineet Dikshit

विदेश मंत्रालय के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि भारत-चीन सीमा पर स्थानीय स्तर पर तनाव और आमने-सामने की घटनाएं समय-समय पर जारी रहने के बावजूद नई दिल्ली का आधिकारिक रुख यही है कि मौजूदा सैन्य और राजनयिक तंत्र स्थिति को संभालने, तनाव को बढ़ने से रोकने और एलएसी पर स्थिरता बनाए रखने में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, जबकि व्यापक सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी भी लंबित है।