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मोदी-टस्क वार्ता: रक्षा से सेमीकंडक्टर तक सहयोग का दायरा बढ़ेगा

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भारत और पोलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के उद्देश्य से रक्षा, अंतरिक्ष, उन्नत प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक के बाद जारी साझा दृष्टिकोण में दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया।

इसके लिए भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण और उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।

भारत और पोलैंड ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उसके सभी रूपों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने आतंकवादी संगठनों के खिलाफ प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क पर अंकुश लगाने की आवश्यकता दोहराई।

वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति भी प्रमुखता से उठी। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून आधारित व्यवस्था, समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत ने पोलैंड को अपनी हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।

अंतरिक्ष क्षेत्र को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया। इस क्षेत्र में संस्थागत सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ उद्योग जगत की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर सहमति बनी।

सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजिटल नवाचार और साइबर सुरक्षा को भी भविष्य के सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया।

बैठक में हरित अर्थव्यवस्था और संसाधनों के सतत उपयोग से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने बैटरी रीसाइक्लिंग, दुर्लभ खनिजों के प्रसंस्करण, भूविज्ञान, खनन और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला के विकास में सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक विचार-विमर्श किया। इस दिशा में एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में भारत के महत्वपूर्ण साझेदारों में शामिल पोलैंड के साथ बढ़ता सहयोग न केवल व्यापारिक अवसरों को बढ़ाएगा बल्कि रक्षा, तकनीक और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी को नया बल देगा।