मणिपुर के सुरक्षा परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांगपोकपी जिले स्थित सीनाई कैंप का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। यह कैंप सरकार के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते के अंतर्गत संचालित कुकी उग्रवादी संगठनों का नामित शिविर था। यह कार्रवाई सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए एक बड़े संयुक्त अभियान के बाद की गई।
हाल ही में कैंप के समीप हुए एक घात लगाकर किए गए हमले में तीन मैतेई नागरिकों की हत्या के बाद मणिपुर पुलिस, CRPF की विशेष कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन (CoBRA) तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त अभियान शुरू किया था।
अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने कैंप को निशस्त्र कर पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया।

अधिकारियों के अनुसार अभियान में कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। सीनाई कैंप को आधिकारिक रूप से कुकी नेशनल आर्मी (KNA) और कुकी लिबरेशन आर्मी (KLA) के लगभग 150 कैडरों के लिए नामित किया गया था, लेकिन सुरक्षा बलों को वहां केवल 17 लोग ही मिले।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि मौजूद कुछ लोग कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिए खुद को पंजीकृत SoO कैडर के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे। इसके बाद अधिकारियों ने व्यापक सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस घटनाक्रम ने SoO व्यवस्था के तहत स्थापित नामित शिविरों के संचालन पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही राज्य में सक्रिय उग्रवादी समूहों द्वारा युद्धविराम संबंधी नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
सीनाई कैंप का संबंध KNA और KLA से है, जो कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (KNO) के अंतर्गत आने वाले सशस्त्र संगठन हैं। KNO केंद्र सरकार और मणिपुर सरकार के साथ हुए SoO समझौते के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल है।
समझौते के तहत उग्रवादी कैडरों को निर्धारित शिविरों के भीतर रहना अनिवार्य है, जबकि उनके हथियार निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार जमा कर निगरानी में रखे जाने चाहिए।
सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद यह किसी SoO-नामित शिविर के खिलाफ की गई सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक है।
माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम से मौजूदा निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता तथा समझौते के प्रावधानों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता को लेकर बहस और तेज होगी।
अभियान के बाद मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने सीनाई कैंप का दौरा कर जमीनी सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया।
इस दौरान उन्होंने कैंप परिसर का निरीक्षण किया और CRPF तथा असम राइफल्स के अधिकारियों से अभियान की पूरी जानकारी प्राप्त की।
अधिकारियों ने उन्हें क्षेत्र की कानून-व्यवस्था की स्थिति से भी अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के जवानों से बातचीत करते हुए सफल अभियान और कैंप पर नियंत्रण स्थापित करने में CoBRA बटालियन की भूमिका की सराहना की।
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तलाशी एवं कॉम्बिंग अभियानों के दौरान निर्दोष नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सुरक्षा बलों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान CRPF, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा स्थानीय विधायक थोकचोम राधेश्याम भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहे।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मणिपुर में SoO व्यवस्था के भविष्य और विभिन्न सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को लेकर राजनीतिक तथा सुरक्षा स्तर पर लगातार चर्चा जारी है।
विश्लेषकों का मानना है कि सीनाई कैंप से जुड़े ये घटनाक्रम नामित उग्रवादी शिविरों के प्रति सरकार की भविष्य की नीति तथा SoO तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।
जांच आगे बढ़ने के साथ सुरक्षा एजेंसियां पंजीकृत कैडरों की वास्तविक स्थिति और समझौते की शर्तों के अनुपालन की गहन पड़ताल करेंगी। ऐसे में सीनाई कैंप का मामला मणिपुर में शांति और स्थिरता बहाल करने के प्रयासों में एक संभावित निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।







