वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच लोकतांत्रिक शासन, तकनीकी बदलाव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के लिए ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के सांसद मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में एकत्र हुए।

मंच का उद्घाटन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ब्रिक्स देशों से संसदीय सहयोग को और मजबूत करने तथा जन-केंद्रित विकास, सतत प्रगति और वैश्विक शांति के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिन साझा चुनौतियों का सामना कर रही है, उनके समाधान और देशों के बीच बेहतर समझ विकसित करने में संसदों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता का उल्लेख करते हुए बिरला ने क्षेत्रीय संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितताओं, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ये समस्याएं अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रह गई हैं, इसलिए इनके समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
उन्होंने कहा, “संसदें जनता की आकांक्षाओं और आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे देशों के बीच विश्वास बढ़ाने, तनाव कम करने और रचनात्मक सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।”

मंच के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के संसदीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक और विकास संबंधी कई समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
यह बैठक ब्रिक्स ढांचे के भीतर संसदीय कूटनीति की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।
मंच के पहले पूर्ण सत्र में बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच संस्थागत मजबूती और लोकतांत्रिक शासन में संसदों की भूमिका पर चर्चा की गई।
इसमें शामिल प्रतिनिधियों ने विधायी सहयोग बढ़ाने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने और उभरती वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्थाओं की क्षमता मजबूत करने पर विचार रखे।
चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि तेजी से बदलते राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी परिवेश में मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं ही स्थिरता, जवाबदेही और प्रभावी शासन सुनिश्चित कर सकती हैं।
दूसरे पूर्ण सत्र का प्रमुख विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीकों का समाज तथा शासन व्यवस्था पर बढ़ता प्रभाव रहा।
प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि तकनीकी प्रगति का केंद्र मानव कल्याण और समावेशी विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकी बदलावों को अपनाते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि नवाचार जिम्मेदार, सुलभ और समाज के सभी वर्गों के लिए लाभकारी हो।
उन्होंने कहा कि डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने, जनहित की रक्षा करने और नैतिक तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने वाले नियामकीय ढांचे तैयार करने में संसदों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान ओम बिरला ने संयुक्त अरब अमीरात, चीन और ईरान के वरिष्ठ संसदीय नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में संसदीय संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

ब्रिक्स संसदीय मंच सदस्य और भागीदार देशों को शासन, विकास, नई प्रौद्योगिकियों और वैश्विक सहयोग जैसे विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है। साथ ही यह अधिक समावेशी और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के प्रति ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।







