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ब्रिक्स संसदीय मंच ने पश्चिम एशिया में संयम बरतने की अपील की

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ब्रिक्स सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और स्थिति को और गंभीर बनाने वाले कदमों से बचने की अपील की है।

यह अपील नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के समापन पर सर्वसम्मति से पारित संयुक्त घोषणा में की गई।

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घोषणा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। साथ ही देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया। सदस्य देशों ने क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए संवाद और कूटनीति को बढ़ावा देने की वकालत की।

आर्थिक मोर्चे पर ब्रिक्स देशों ने वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा प्रवाह को निर्बाध बनाए रखने के महत्व पर बल दिया। घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत माने जाने वाले एकतरफा दबावपूर्ण उपायों और प्रतिबंधों का भी विरोध किया गया। सदस्य देशों ने कहा कि ऐसे कदम आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

मंच ने वैश्विक शासन संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिक, न्यायसंगत और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से सुधारों के समर्थन को दोहराया। सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए वैश्विक विकास में ग्लोबल साउथ के योगदान को रेखांकित किया।

संयुक्त घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मुकाबला करने की ब्रिक्स की प्रतिबद्धता को भी दोहराया गया। सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 26 लोगों की मृत्यु हुई थी। साथ ही आतंकवाद के वित्तपोषण, सीमा-पार आतंकवाद और आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया गया।

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के प्रति शून्य-सहनशीलता की नीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए आतंकवाद विरोधी प्रयासों में दोहरे मानदंडों को अस्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर घोषणा में राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को लागू करने, शमन और अनुकूलन उपायों को मजबूत करने तथा न्यायसंगत ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया गया।

“जन-केंद्रित विकास के लिए संसदों को सशक्त बनाना” विषय पर आयोजित दो दिवसीय मंच में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के संसदीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भाग लेने वाले देशों ने मंच के सफल आयोजन के लिए भारत को बधाई दी और भारतीय संसद तथा देश की जनता द्वारा प्रदान किए गए आतिथ्य के लिए आभार व्यक्त किया।