सरकार ने अब औपचारिक और गौरवपूर्ण रूप से उन सभी छह सैन्य कर्मियों के नामों की घोषणा कर दी है — जिनमें पांच भारतीय सेना से और एक भारतीय वायु सेना (IAF) से हैं — जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
इन शहीद नायकों को श्रद्धांजलि के रूप में उनके नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) की एक दीवार पर अंकित किए गए हैं।
मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए इस सैन्य अभियान के बाद यह पहली बार है जब सरकार ने इन छह कर्मियों के नामों को जारी किया है।
ऑपरेशन सिंदूर को 22 अप्रैल को हुए घातक पहलगाम आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया था।

चंडीगढ़ से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘द ट्रिब्यून’ ने 25 जून 2026 के अपने सुबह के संस्करण में इस खबर को सबसे पहले प्रकाशित किया था, जिसे इसके वरिष्ठ पत्रकार अजय बनर्जी ने लिखा था।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 वीर शहीदों के नाम:
- सूबेदार मेजर पवन कुमार — मुख्यालय 10 इन्फैंट्री ब्रिगेड
- राइफलमैन सुनील कुमार — जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की चौथी बटालियन
- लांस नायक दिनेश कुमार — 5 फील्ड रेजिमेंट
- अग्निवीर मूड मुरली नायक — 851 लाइट रेजिमेंट
- हवलदार सुनील कुमार सिंह — 237 फील्ड वर्कशॉप
- सार्जेंट सुरेंद्र कुमार — वायु सेना की 39वीं विंग
राइफलमैन सुनील कुमार को देश के तीसरे सबसे बड़े युद्ध सम्मान ‘वीर चक्र’ से और सार्जेंट सुरिंदर कुमार को ‘वायु सेना पदक’ से सम्मानित किया गया है।
अजय बनर्जी लिखते हैं, ‘इन छह शहीदों में से अधिकांश जम्मू-कश्मीर में तैनात थे।
सूत्रों ने बताया कि सुनील कुमार पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात थे।
8 जून को, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रक्षा अलंकरण समारोह में सुनील कुमार को मरणोपरांत वीर चक्र प्रदान किया। यह पुरस्कार उनकी माता सुदेश कुमारी और पिता यश पाल ने ग्रहण किया।’
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में त्याग चक्र (बलिदान का चक्र) शामिल है, जिसमें पूरी तरह से ग्रेनाइट ईंटों से बनी 16 संकेंद्रित (कॉन्सेंट्रिक) गोलाकार दीवारें हैं।
ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, प्रत्येक ईंट पर स्वतंत्रता के बाद से सर्वोच्च बलिदान देने वाले एक शहीद का नाम, रैंक और रेजिमेंट अंकित है।







