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सिक्किम सीमा पर जवानों संग राजनाथ की दिवाली

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पूरे देश में जहां लोग अपने परिवारों के साथ दीपावली का त्योहार मना रहे थे, वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिक्किम में भारत-चीन सीमा के निकट तैनात सैनिकों के बीच पहुंचकर जवानों के साथ दीपावली मनाई।

उन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सैनिकों के साहस, समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की।

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रक्षा मंत्री ने त्रिशक्ति कोर (33 कोर) के उन सैनिकों से मुलाकात की जो सिक्किम के अग्रिम इलाकों में तैनात हैं।

इस दौरान उनके साथ थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल वी.एम.बी. कृष्णन, 33 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल मन राज सिंह मान सहित सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जवानों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगे सैनिकों की निष्ठा, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने उन सैनिकों के त्याग को भी नमन किया जो त्योहारों और पारिवारिक अवसरों पर अपने घरों से दूर रहकर राष्ट्र सेवा को सर्वोपरि रखते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक हथियार युद्ध क्षमता को मजबूत बना सकते हैं, लेकिन किसी भी सैनिक की असली पहचान उसके साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से होती है।

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उन्होंने सैनिकों से स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास और सहयोग की परंपरा को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।

अपने दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने शेराथांग युद्ध स्मारक पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि ऐसे स्मारक केवल अतीत की वीरगाथाओं को संजोकर नहीं रखते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि इस स्मारक में जिन शहीदों को याद किया गया है, वे नागालैंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों से थे।

उनकी शहादत इस बात का प्रतीक है कि जब राष्ट्र की रक्षा की बात आती है तो भाषा, क्षेत्र और समुदाय की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं।

दौरे का एक विशेष पड़ाव था बाबा हरभजन सिंह स्मारक, जो पूर्वी हिमालय क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध सैन्य स्मारकों में से एक माना जाता है।

नाथू ला क्षेत्र के निकट स्थित यह स्मारक पंजाब रेजिमेंट के सिपाही हरभजन सिंह की स्मृति में बनाया गया है, जिनका 1968 में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया था।

समय के साथ वे सैनिकों और स्थानीय लोगों के बीच एक श्रद्धेय व्यक्तित्व बन गए और सिक्किम सीमा क्षेत्र की लोक परंपराओं तथा सैन्य किंवदंतियों का हिस्सा बन गए।

बाबा हरभजन सिंह के बारे में माना जाता है कि उनका समर्पण और कर्तव्यबोध आज भी सीमा पर तैनात सैनिकों को प्रेरित करता है।

हर वर्ष बड़ी संख्या में सैनिक, स्थानीय नागरिक और पर्यटक इस स्मारक पर श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।

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रक्षा मंत्री ने स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बाबा हरभजन सिंह की विरासत आज भी इस क्षेत्र की सैन्य और सामाजिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है।

सिक्किम सेक्टर भारत की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक क्षेत्र माना जाता है, जहां सैनिक सालभर ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच तैनात रहते हैं।

ऐसे में रक्षा मंत्री का यह दौरा सीमा पर तैनात जवानों के प्रति देश के सम्मान और समर्थन का संदेश लेकर आया।

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जब देशभर में दीपों की रोशनी से घर जगमगा रहे थे, तब सिक्किम की बर्फीली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच जवान राष्ट्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे थे।

राजनाथ सिंह का यह दौरा उन सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण अवसर बन गया।