भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद् नवनेथम “नवी” पिल्लै को शांति, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके आजीवन योगदान के लिए वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकारों की पूर्व उच्चायुक्त और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की न्यायाधीश रह चुकीं पिल्लै ने रंगभेद (अपार्थाइड) के दौर वाले दक्षिण अफ्रीका की कठिन परिस्थितियों से उभरकर न्याय, समानता और मानवाधिकारों की वैश्विक आवाज़ के रूप में अपनी पहचान बनाई।
साल 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में तमिल भारतीय मूल के परिवार में जन्मीं पिल्लै ने रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं की कानूनी पैरवी करते हुए एक प्रतिष्ठित विधिक करियर बनाया।
उन्होंने समाज के वंचित और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाद में वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं।
उनके अंतरराष्ट्रीय न्यायिक करियर में रवांडा के लिए गठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (ICTR) में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में भी न्यायाधीश के रूप में कार्य किया।
वर्ष 2008 से 2014 तक पिल्लै संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं।
इस दौरान उन्होंने वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार मानकों को मजबूत करने और उनके संरक्षण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिने जाने वाले नोबेल शांति पुरस्कार के माध्यम से उन व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने शांति, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में असाधारण योगदान दिया हो।
वर्ष 2026 का यह पुरस्कार नोबेल शांति पुरस्कार की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदान किया गया है।







