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कोरोना की तीसरी लहर सिर्फ़ दिल्ली में

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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन मानते हैं कि दिल्ली में कोरोना का तीसरा दौर अपने चरम पर चल रहा है और जल्दी ही संक्रमण के मामलों में कमी आनी शुरू हो जाएगी। उनके मुताबिक कोरोना के मरीजों के लिए दिल्ली के अस्पतालों में आधे से अधिक बेड अभी भी खाली हैं।

  स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक कोई व्यक्ति संक्रमित हो जाता है तो उसके पूरे परिवार और उसके संपर्क में आए सभी लोगों की टेस्टिंग की जा रही है जिसकी वजह से मामले ज़्यादा आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए छह सात लोगों की जांच की जा रही थी, अब यह संख्या पंद्रह से ऊपर है। सत्येंद्र जैन ने यह भी कहा कि दिल्ली के अस्पतालों में आधे से ज्यादा लगभग 9500 बेड उपलब्ध हैं।

  दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टरों ने भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए हेल्थ अलर्ट जारी किया है। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का भी कहना था कि राजधानी में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि पहली बार संक्रमित होने के बाद इम्यूनिटी का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि एक बार कोरोना हो चुका है तो ऐसा बिलकुल नहीं है कि वह दोबारा नहीं होगा। इसलिए ठीक होने के बाद भी आपको मास्क पहनना, लोगों से दूरी बना कर रखना और किसी भी चीज को छूने के बाद हाथ साफ करना कतई न भूलें।

  डॉ. रणदीप गुलेरिया ने साफ कहा कि प्रदूषण ने कोरोना को और भी घातक बना दिया है। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली की तरह पूरे देश में संक्रमण के मामलों में तेजी आती तो हम कह सकते थे कि पूरे देश में तीसरी लहर आ पहुंची है। लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं है और देश के बाकी हिस्सों में संक्रमितों की संख्या घट रही है।

  इससे पहले एम्स के पल्मोनरी विभाग के डॉक्टरों ने एक बयान में कहा था कि प्रदूषण के कारण दिल्ली के हालात काफी संगीन हैं। ऐसे में खास कर गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे बाहर न निकलें। अस्थमा के मरीज भी बाहर न निकलें। घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखें और सुबह-शाम की सैर को कुछ समय के लिए बंद कर दें।

  एम्स के एक अध्ययन से पता लगा है कि देश में जो लोग भी कोरोना से संक्रमित हुए उनमें 40 प्रतिशत लोग बिना लक्षण वाले या मामूली लक्षण वाले थे। बिना लक्षण वाले मामले सबसे ज्यादा 12 साल से कम उम्र के बच्चों में पाए गए। इसके बाद ऐसे मामले सबसे ज्यादा 80 साल से ऊपर की उम्र वालों में मिले।

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