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चंदा चोरी के संगीन मामले में लीपा पोती करने की बजाय ट्रस्ट को तत्काल भंग करना चाहिए : गहलोत

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कांग्रेस ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी तथा घोटाले के मामले अत्यंत गंभीर हैं और इसमें किसी तरह की लीपापोती करने की बजाय ट्रस्ट को तत्काल भंग करके नये ट्रस्ट का गठन किया जाना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार 7 जुलाई 2026 को कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राम मंदिर में जमीन अधिग्रहण से लेकर चंदा चोरी तक के गंभीर आरोप लगाए हैं।

अशोक गहलोत  के अनुसार नरेंद्र मोदी ने साधु संतों को दरकिनार कर इस मंदिर का उद्घाटन किया और मंदिर निर्माण का पूरा श्रेय लिया लेकिन जब चंदा चोरी से जनता के साथ विश्वासघात हुआ और उनकी आस्था को ठेस पहुंची तो प्रधानमंत्री ने मौन धारण कर लिया।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी का मुद्दा देश के गांव-गांव तक पहुंच गया है, सभी लोगों में इसे लेकर आक्रोश है।

प्रभु श्री राम के अयोध्या स्थित मंदिर से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, जिसे भारतीय जनता पार्टी – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (भाजपा-आरएसएस) ने गहरा आघात पहुंचाया है।

 गहलोत ने कहा भाजपा-आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने मिलकर एकतरफा तरीके से मंदिर ट्रस्ट बनाया लेकिन किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

काँग्रेस के अनुसार चढ़ावा चोरी होने की जानकारी बहुत पहले से थी लेकिन इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और बातों को दबा दिया गया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि ट्रस्ट में किसको रखना है यह निर्णय आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने ही लिया इसलिए उसके ही लोग इसमें भरे गये। उनका कहना था कि पहले पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के समय जिस ट्रस्ट की बात हुई थी उसको आधार बनाकर चलते तो शायद इतना बड़ा घोटाला नहीं होता और करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को इस तरह से आाघत नहीं पहुंचता।

उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि इस मामले में अब भी लीपापोती की जा रही है।

चंदा चोरी को लेकर सोमवार को ट्रस्ट की बैठक हुई जिसमें चंपत राय सहित कुछ लोगों के इस्तीफे स्वीकार करने की बात कही गई है लेकिन बैठक में लिये गये निर्णयों को लेकर जो सूचनाएं दी गई उसमें चंदा चोरी की घटना की वजह लापरवाही बताई गई है।

उन्होंने इसे आश्चर्यचकित करने वाला बयान बताया और कहा कि जब सब कुछ आरएसएस विश्व हिंदू परिषद के लोगों के हवाले है और समय रहते घोटाला होने की बात सामने आने की बात भी कही जा रही है तो लापरवाही कहां से हुई। उनका कहना था कि जिम्मेदारी तय की जानी आवश्यक है और दोषियों को दंड मिले इसके लिए पूरे प्रकरण की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में मामले की व्यापक जांच हो।

कांग्रेस ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी तथा घोटाले के मामले अत्यंत गंभीर हैं और इसमें किसी तरह की लीपापोती करने की बजाय ट्रस्ट को तत्काल भंग करके नये ट्रस्ट का गठन किया जाना चाहिए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार 7 जुलाई 2026 को कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राम मंदिर में जमीन अधिग्रहण से लेकर चंदा चोरी तक के गंभीर आरोप लगाए हैं।

अशोक गहलोत  के अनुसार नरेंद्र मोदी ने साधु संतों को दरकिनार कर इस मंदिर का उद्घाटन किया और मंदिर निर्माण का पूरा श्रेय लिया लेकिन जब चंदा चोरी से जनता के साथ विश्वासघात हुआ और उनकी आस्था को ठेस पहुंची तो प्रधानमंत्री ने मौन धारण कर लिया।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी का मुद्दा देश के गांव-गांव तक पहुंच गया है, सभी लोगों में इसे लेकर आक्रोश है।

प्रभु श्री राम के अयोध्या स्थित मंदिर से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, जिसे भारतीय जनता पार्टी – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (भाजपा-आरएसएस) ने गहरा आघात पहुंचाया है।

 गहलोत ने कहा भाजपा-आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के लोगों ने मिलकर एकतरफा तरीके से मंदिर ट्रस्ट बनाया लेकिन किसी की कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

काँग्रेस के अनुसार चढ़ावा चोरी होने की जानकारी बहुत पहले से थी लेकिन इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और बातों को दबा दिया गया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि ट्रस्ट में किसको रखना है यह निर्णय आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने ही लिया इसलिए उसके ही लोग इसमें भरे गये। उनका कहना था कि पहले पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के समय जिस ट्रस्ट की बात हुई थी उसको आधार बनाकर चलते तो शायद इतना बड़ा घोटाला नहीं होता और करोड़ों राम भक्तों की भावनाओं को इस तरह से आाघत नहीं पहुंचता।

उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि इस मामले में अब भी लीपापोती की जा रही है।

चंदा चोरी को लेकर सोमवार को ट्रस्ट की बैठक हुई जिसमें चंपत राय सहित कुछ लोगों के इस्तीफे स्वीकार करने की बात कही गई है लेकिन बैठक में लिये गये निर्णयों को लेकर जो सूचनाएं दी गई उसमें चंदा चोरी की घटना की वजह लापरवाही बताई गई है।

उन्होंने इसे आश्चर्यचकित करने वाला बयान बताया और कहा कि जब सब कुछ आरएसएस विश्व हिंदू परिषद के लोगों के हवाले है और समय रहते घोटाला होने की बात सामने आने की बात भी कही जा रही है तो लापरवाही कहां से हुई।

उनका कहना था कि जिम्मेदारी तय की जानी आवश्यक है और दोषियों को दंड मिले इसके लिए पूरे प्रकरण की उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में मामले की व्यापक जांच हो।