भारत ने सऊदी अरब में महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि ऐसे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। साथ ही भारत ने सऊदी अरब की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन में उसके साथ अपनी एकजुटता दोहराई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित नियमित मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत अरामको मुख्यालय पर हुए हमले की कड़ी निंदा करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की गतिविधियों को तुरंत समाप्त होना चाहिए।
जायसवाल ने कहा कि भारत सऊदी अरब की जनता और सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है तथा उम्मीद करता है कि क्षेत्र में जल्द शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।
सऊदी अरब में भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी
सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय की स्थिति पर जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि रियाद स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और उनकी सुरक्षा एवं कल्याण पर नजर रखे हुए है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक परामर्श (एडवाइजरी) जारी किए गए हैं। जायसवाल ने कहा कि रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले के बाद उड़ान सेवाओं में कुछ व्यवधान देखने को मिला है। भारतीय विमानन कंपनियां इससे प्रभावित हुई हैं, हालांकि कई सऊदी एयरलाइंस भारत और सऊदी अरब के बीच अपनी सेवाएं जारी रखे हुए हैं।
भारत–ईरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता
भारत और ईरान के बीच हालिया सुरक्षा वार्ता के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में जायसवाल ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 12 अक्टूबर को अपने ईरानी समकक्ष डॉ. मोहसिन रेजाई से बातचीत की थी।
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य तथा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान भारतीय नाविकों और भारतीय टैंकरों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया।
दिल्ली से जुड़े OHCHR के बयानों को भारत ने खारिज किया
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति पर हाल में की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने कहा कि ये टिप्पणियां “अनुचित और अस्वीकार्य” हैं।
उन्होंने OHCHR पर चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में जारी विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाइयों पर संगठन ने इसी तरह की सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यदि ऐसी प्रवृत्ति जारी रहती है तो इससे बहुपक्षीय संस्थाओं में लोगों का विश्वास कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित अंतरराष्ट्रीय संगठनों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।







