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मानव विकास सूचकांक में भारत और नीचे

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ग्लोबल ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स यानी4 वैश्विक मानव विकास सूचकांक में इस साल भारत 188 देशों में 131वें नंबर पर रहा। पिछले साल भारत 129वें स्थान पर था, यानी वह दो पायदान और नीचे खिसक गया है।

यूएनडीपी यानी यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम के इस सूचकांक में नॉर्वे पहले, आयरलैंड दूसरे और स्विटजरलैंड तीसरे नंबर पर हैं। सूचकांक के साथ जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की ग्रॉस नेशनल इनकम और प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति समानता 2018 में 6829 डालर थी जो 2019 में गिर कर 6681 डालर हो गई। इसके हिसाब से 2019 में जन्म के समय भारतीयों की जीवन प्रत्याशा 69.7 थी जबकि बांग्लादेश की जीवन प्रत्याशा 72.6 और पाकिस्तान की 67.3 थी।

इस बार के सूचकांक में पाकिस्तान 154 वें स्थान पर है जबकि श्रीलंका 72वें, भूटान 129वें, बांग्लादेश 133वें और नेपाल 142वें नंबर पर आया है। भारत, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान को मध्यम मानव विकास वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है। चीन इस सूचकांक में 85वें पायदान स्थान पर है।
रिपोर्ट कहती है कि 2019 के लिए भारत की एचडीआई वेल्यू 0.645 है, जिसके कारण भारत मध्यम मानव विकास श्रेणी में है। 1990 से 2019 के बीच भारत की एचडीआई वेल्यू 0.429 से बढ़ कर 0.645 पर पहुंच गई है जोकि 50.3 का सुधार है। 1990 और 2019 के बीच जन्म के समय भारत की जीवन प्रत्याशा में 11.8 साल की बढ़ोत्तरी हुई है। साथी ही भारत की ग्रॉस नेशनल इनकम प्रति व्यक्ति 1990 से 2019 के बीच लगभग 273.9 फीसदी बढ़ी। मानव विकास सूचकांक में लंबे और स्वस्थ जीवन, शिक्षा और आमदनी के हिसाब से नंबर दिए जाते हैं। यह सूचकांक 1990 से जारी किया जा रहा है।

 

 

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