न्यूज़गेट प्रैस नेटवर्क
वैसे तो पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनाव रणनीतिकार पीके यानी प्रशांत किशोर को अपना सलाहकार नियुक्त कर रखा है। लेकिन अब माना जा रहा है कि कैप्टन और प्रशांत किशोर का साथ इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे क्या आते हैं। अगर ये नतीजे तृणमूल कांग्रेस के विरुद्ध गए तो कैप्टन के लिए इस दोस्ती को आगे ले जाना मुश्किल पड़ेगा। दिलचस्प यह है कि खुद प्रशांत किशोर कह चुके हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सौ से ज्यादा सीटें आने पर वे अपने काम से संन्यास ले लेंगे।
पंजाब में अगले साल ही विधनसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस इस चुनाव के लिए प्रशांत किशोर से अनुबंध कर चुकी है। लेकिन अब राज्य कांग्रेस के तमाम नेता इस सिलसिले में पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों का इंतजार कर रहे हैं। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पंजाब में कांग्रेस के कई विधायक प्रशांत किशोर के दखल से खुश नहीं हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जब प्रशांत किशोर को अपना प्रमुख राजनीतिक सलाहकार बनाया था तो उसके बाद पार्टी विधायकों की बैठक बुला कर जब उन्होंने प्रशांत किशोर के बारे में जानकारी ली तो उन्हें कई विधायक नाराज मिले थे। कई विधायकों का कहना था कि प्रशांत उन्हें बुला कर ऐसे बातचीत करते हैं मानो वे कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ से भी ऊपर हो गए।
इस बैठक के बाद यह मामला कुछ ही दिन में शांत हो गया था। लेकिन पिछले दिनों जब यह खबर उछली कि प्रशांत किशोर ने करीब 30 विधायकों की सूची आलाकमान को सौंपी है और सिफारिश की है कि इन विधायकों को अगले विधानसभा चुनाव में टिकट न दिया जाए, तो मामला फिर भड़क उठा। कांग्रेस के इन विधायकों सकी नाराजगी फिर उभऱ आई। यह अलग बात है कि उनमें से किसी ने भी सार्वजनिक तौर पर अपना विरोध प्रकट नहीं किया है, लेकिन पार्टी के भीतर यह मसला एक बड़ा विवाद बन चुका है। हालत यह हो गई कि खुद कैप्टन को प्रशांत किशोर के बचाव में आगे आना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशांत किशोर केवल सलाहकार हैं और वे सलाह ही दे सकते हैं। किसी को टिकट देना या नहीं देना, यह प्रशांत तय नहीं करेंगे, बल्कि पार्टी हाईकमान जो प्रक्रिया तय करेगा उसी के अनुसार उम्मीदवार तय किए जाएंगे। कहा जा सकता है कि तभी से प्रदेश के कांग्रेस विधायकों ने अब 2 मई का इंतजार करना शुरू कर दिया है। वे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। कुछ विधायकों ने पत्रकारों से भी कहा है कि दीदी के बंगाल के नतीजे देख लें, उसके बाद प्रशांत पर बात की जाएगी। एक तरह से ये विधायक प्रशांत किशोर की योग्यता पर सवाल उठाने की तैयारी में हैं।
साफ है कि ममता बनर्जी अगर तीसरी बार पश्चिम बंगाल की सत्ता में लौटने से चूक गईं तो पंजाब कांग्रेस में प्रशांत किशोर का मुद्दा जोर पकड़ सकता है। उस हालत में प्रशांत किशोर के लिए कैप्टन के साथ काम कर पाना आसान नहीं रहेगा। हो सकता है कि तब कैप्टन को अपनी पार्टी के सहयोगियों की बात माननी पड़े और प्रशांत किशोर अलग-थलग कर दिए जाएं। मगर यह यह तभी हगा जब पश्चिम बंगाल में भाजपा जीतती है। अगर वहां ममता फिर सत्ता में आती हैं तो कैप्टन अमरिंदर सिंह के यहां प्रशांत किशोर की पूछ और बढ़ जाएगा। मगर इसमें भी पेंच यह है कि बंगाल में ऊभाजपा की सौ से ज्यादा सीटें नहीं आए।
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