न्यूज़गेट प्रेस नेटवर्क
ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने वाले विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 (वीबी-जी-राम-जी) के नियमों का मसौदा सरकार ने जारी कर दिया है।
इन्हें अंतिम रूप देने से पहले इन पर सभी संबंधित पक्षों से राय और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।
ध्यान रहे, यह कानून मनरेगा का स्थान लेगा और आगामी पहली जुलाई से देश भर में लागू किया जाने वाला है। प्रस्तावित नियमों में संक्रमणकालीन प्रावधान, राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति और केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक खर्चों, शिकायतों के निपटारे और मजदूरी के भुगतान से संबंधित प्रावधान भी इन नियमों के मसौदे में इंगित किए गए हैं।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इन नियमों से पूरे देश में इस कानून के लिए संस्थागत, प्रशासनिक और वित्तीय ढांचा तय होगा। उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों से सुझाव मांगने की प्रक्रिया का मकसद राज्यों, संस्थानों, विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों और आम लोगों से रचनात्मक प्रतिक्रिया हासिल करना है।
इन सूत्रों का कहना है कि ये मसौदा नियम मनरेगा से वीबी-ग्राम जी में तब्दीली की एक रूपरेखा की तरह हैं। ये सुनिश्चित करते हैं कि संक्रमण काल में चल रहे कार्य प्रभावित न हों।
इनसे ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड की वैधता बनी रहेगी। इसी तरह राज्यों द्वारा नई योजना अधिसूचित होने तक श्रमिकों के अधिकार जारी रहेंगे।
इन मसौदा नियमों में राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति की भूमिका और जिम्मेदारियां भी शामिल हैं। साथ ही केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन और कार्यों का भी उल्लेख भी। यही नहीं, इनमें प्रशासनिक खर्चों का प्रबंधन और शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना भी शामिल है।
मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान के तरीके भी इनमें बताए गए हैं।







