वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, टाइगर पुनर्स्थापन कार्यक्रम (Tiger Reintroduction Programme) के तहत पहली बाघिन को शुक्रवार को बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया।

टी138 (T138) के रूप में चिन्हित इस बाघिन को रिजर्व में बाघों की व्यवहार्य आबादी को पुनर्स्थापित करने के प्रयासों के तहत बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाया गया है।
इस पुनर्स्थापन कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, यह पहल वन्यजीव सप्ताह 2026 की शुरुआत के साथ की गई है और इसका उद्देश्य बक्सा को एक महत्वपूर्ण बाघ आवास क्षेत्र के रूप में उसकी ऐतिहासिक पहचान दिलाना है।
सोशल मीडिया पर साझा एक संदेश में भूपेंद्र यादव ने कहा कि टी138 को सफलतापूर्वक वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से बक्सा टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने इस प्रयास के लिए बिहार और पश्चिम बंगाल सरकारों का आभार भी व्यक्त किया।

वर्ष 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया बक्सा, भूटान और असम के वनों से जुड़े एक व्यापक पारिस्थितिक परिदृश्य का हिस्सा है। हालांकि, आवास क्षेत्र के क्षरण, उसके विखंडन और शिकार प्रजातियों की घटती उपलब्धता के कारण यहां स्थायी बाघ आबादी धीरे-धीरे समाप्त हो गई थी।
वर्ष 2018 से पश्चिम बंगाल सरकार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के सहयोग से टाइगर संवर्धन एवं पुनरुद्धार परियोजना (Tiger Augmentation and Recovery Project) चला रही है। इस परियोजना का उद्देश्य आवास की गुणवत्ता में सुधार, सुरक्षा उपायों को मजबूत करना और शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाना है।
इन प्रयासों के तहत अब तक 800 से अधिक चीतलों को रिजर्व में छोड़ा जा चुका है, जबकि पिछले आठ वर्षों में लगभग 380 हेक्टेयर घासभूमि का पुनर्स्थापन किया गया है।
टी138 की रिहाई बक्सा के दीर्घकालिक बाघ पुनरुद्धार कार्यक्रम की शुरुआत का प्रतीक है और रिजर्व के पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण







