लोकसभा में पेपर लीक तथा लोक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पेश “लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026” सोमवार 27 जुलाई 2026 को चर्चा के लिए पेश किया गया लेकिन कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण इस पर चर्चा नहीं हो सकी और अंततः सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
तीन बार के स्थगन के बाद शाम पांच बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी।
विपक्ष के सदस्य तख्तियां लेकर सदन के बीचोंबीच आ गए।
पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह करते हुए कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है।
इसकी प्रति सभी सदस्यों को पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी है, इसलिए सदस्यों को इस पर चर्चा करनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “कई सदस्य विधेयक पर चर्चा के लिए पूरी तैयारी के साथ आए हैं। विपक्ष के कई सदस्यों ने संशोधन भी दिए हैं। यह बच्चों और छात्रों के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है। वक्ता भी चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल जानबूझकर इस विधेयक पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं। मैं बहुत दुखी मन से कह रहा हूं कि पहले दिन यही लोग पेपर लीक पर चर्चा की मांग कर रहे थे।”
उन्होंने कहा कि सरकार अब विधेयक लेकर आई है और विधेयक को सदन में चर्चा के लिए पेश भी कर किया जा चुका है, लेकिन विपक्ष इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा नहीं होने दे रहा है।
उन्होंने कांग्रेस के सदस्यों से आग्रह करते हुए कहा, “कृपया ऐसा न करें। आपकी छवि पहले ही काफी खराब हो चुकी है। ऐसे कार्य न करें, जिनसे आपकी पार्टी की और बदनामी हो। पूरी पार्टी को एकजुट होकर इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग लेना चाहिए। इस विधेयक का उद्देश्य हमारे युवाओं और छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाना है।”
दोपहर दो बजे अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए सदस्यों से संशोधन विधेयक पर चर्चा प्रारंभ करने का आग्रह किया था। लेकिन कांग्रेस तथा अन्य कई विपक्षी दलों के सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गए और तख्तियां लहराते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
हंगामे के बीच उन्होंने सदस्यों से आग्रह करते हुए कहा कि यह विधेयक देश के करोड़ों विद्यार्थियों की आकांक्षाओं से जुड़ा है और इसका उद्देश्य पेपर लीक तथा लोक परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
उनका कहना था कि लोकतंत्र की शक्ति विचार-विमर्श में निहित है और प्रत्येक सदस्य को इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपने विचार एवं मत व्यक्त करने का अवसर मिलना चाहिए।
श्रिजिजू ने भी कहा कि विधेयक पर बड़ी संख्या में संशोधन और चर्चा के नोटिस प्राप्त हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि सदस्य इस पर चर्चा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब सदस्य चर्चा के इच्छुक हैं, तब कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों के सदस्य चर्चा के समय नारेबाजी क्यों कर रहे हैं, यह समझ से परे है।
अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से कहा कि विधेयक पर चर्चा कीजिए। इस पर छह घंटे चर्चा निर्धारित है और सदन की सहमति से आवश्यकता पड़ने पर चर्चा की अवधि बढ़ाई जा सकती है, ताकि सभी सदस्य अपने सुझाव और विचार रख सकें।
उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटकर चर्चा में भाग लेने की अपील की।
उन्होंने सभी दलों के सदस्यों से विधेयक पर चर्चा के लिए सहमति बनाने का आग्रह किया और सदन की कार्यवाही पांच बजे तक स्थगित कर दी।







