विनीत दीक्षित
नई दिल्ली। देश के उत्तरी इलाकों में जबरदस्त ठंड पड़ रही है। पहाड़ों के ऊंचाई वाले तमाम इलाके बर्फ से ढंक गए हैं। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनातनी वाले स्थानों का भी यही हाल है। वहां के हालात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चीन और भारत की सेनाओं के बीच पिछले अप्रैल में हुई झड़प के कारण पूरे देश में मशहूर हो चुकी पैंगोंग झील का काफी हिस्सा जम चुका है और हमारे जवान जमी हुई झील के ऊपर ही गश्त लगा रहे हैं।
इस तस्वीर में आप जमी हुई पैंगोंग झील की शक्ल देख सकते हैं जिसके ऊपर आईटीबीपी यानी भारत-तिब्बत सीमा सुरक्षा बल के जवान शॉर्ट रेंज पेट्रोलिंग पर निकले हुए हैं ताकि चीनी सेना अथवा पीपल्स लिबरेशन आर्मी की हरकतों पर निगाह रखी जा सके। यह फोबरन गांव वाले छोर से फिंगर-2 और फिंगर-4 के बीच का इलाका है। लद्दाख में जिसे एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल कहते हैं उसके आरपार यहां तापमान जीरो से कहीं नीचे पहुंच चुका है।

जवानों की यह गश्त लगातार चलती है। मौसम ठीक होने पर यानी गर्मियों में पैंगोंग झील पर मशीनगन से लैस स्पीडबोट दौड़ती हैं और पीएलए की हरकतों का ख्याल रखती हैं। इसी तरह, सर्दियों में जब झील का पानी जम जाता है तो उसके ऊपर गश्त लगाना ज़रूरी हो जाता है क्योंकि अप्रैल के बाद से पीएलए की तरफ से चुपचाप किसी तरह की घुसपैठ की आशंका बढ़ गई है। इस विशाल झील का काफी हिस्सा चीन की तरफ पड़ता है और उस हिस्से में चीनी सैनिक पेट्रोलिंग करते रहते हैं।
खतरा तो यह भी रहता है कि चीनी फौज कहीं जमी हुई झील की ऊपरी परत के नीचे से भारतीय क्षेत्र में सेंधमरी न करें। असल में पीपल्स लिबरेशन आर्मी सर्दियों में भी पीछे हटने को तयार नहीं है और पैंगोंग झील की फिंगर-2 से फिंगर-4 के बीच उसने अनेक अवरोध खड़े कर दिए हैं। ऐसे में भारतीय जवानों की तरफ से भी कोई चूक नहीं की जा रही। यही उनका नया साल है।







