न्यूज़गेट प्रैस नेटवर्क

मीतू जैन

कांग्रेस से अलग होकर अपनी अलग पार्टी बनाने की घोषणा कर चुके पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का प्रमुख लक्ष्य अब केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ ग्यारह महीने से चल रहे किसान आंदोलन का कोई हल निकलवाना है। अपने राजनैतिक जीवन को प्रभावी तौर पर आगे खींच पाने के लिए उनके पास इससे बेहतर कोई उपाय भी नहीं है। इसीलिए गुरुवार को उन्होंने दिल्ली आकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से फिर मुलाकात की।

इस मुलाकात में उनके साथ किसानी और आढ़त से जुड़े कुछ और लोग भी थे। इससे पहले बुधवार को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि उनके पास कृषि कानूनों के मसले का कोई समाधान नहीं है। लेकिन हम चर्चा करेंगे तो कुछ हल निकल सकता है, क्योंकि किसान और सरकार दोनों चाहते हैं कि कोई हल निकले। उन्होंने कहा कि मैंने संयुक्त किसान मोर्चा के किसी नेता से बात नहीं की है। वैसे भी मोर्चा किसी राजनेता को अपने आंदोलन में शामिल करने को तैयार नहीं है।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने नई पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा की और कहा कि चुनाव आयोग की मंजूरियों के बाद ही वे पार्टी का नाम बताएंगे। पार्टी के नाम और चुनावचिन्ह पर काम चल रहा है। मगर उनका कहना था कि वे नवजोत सिंह सिद्धू का मजबूती से मुकाबला करेंगे। उनका दावा था कि सिद्धू के आने के बाद कांग्रेस की लोकप्रियता गिरी है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावों में उनकी पार्टी का भाजपा से तालमेल हो सकता है।

यही नहीं, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। उनके मुताबिक इस फैसले से कोई पंजाब पर कब्जा नहीं कर रहा और न इससे संघीय ढांचे को कोई क्षति पहुंची है। बल्कि यह फैसला तो ड्रोन से हथियार और ड्रग्स की सप्लाई को रोकने के लिए किया गया है।

इस अवसर पर कैप्टन ने अपने मुख्यमंत्रित्व के साढ़े चार सालों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश दिया। उनका कहना था कि हमने 2017 में जनता से किए लगभग सभी वादे पूरे किए हैं। जो नहीं हो पाए उन्हें मार्च तक पूरा होना था। उन्होंने यह भी कहा कि चरणजीत चन्नी की सरकार इतने कम समय में कुछ नहीं कर सकेगी।

माना जा रहा है कि पंजाब में कांग्रेस के कुछ विधायक कैप्टन के संपर्क में हैं और उनकी अलग पार्टी बनने का इंतजार कर रहे हैं। शायद कैप्टन चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव तक कांग्रेस को वे लगातार उलझाए रखें और संभलने का मौका न दें। इस मुहिम में उनकी सांसद पत्नी परनीत कौर भी सक्रिय हो गई बताई जाती हैं। वे पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं से मेलजोल में कैप्टन की तरह उदासीन नहीं रहतीं, इसलिए उनकी छवि भी अलग है। उनके जरिए नई पार्टी के पक्ष में समर्थन हासिल किया जा सकता है। इन हालात में हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने यह कह कर हलचल और बढ़ा दी है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह उनके दोस्त थे और रहेंगे। हुड्डा ने कहा कि कैप्टन अपनी नई पार्टी बना लें, उसके बाद भी यह दोस्ती बरकरार रहेगी। (आभार – समय की चर्चा )