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सभी रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी

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किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने विपणन वर्ष 2027-28 के लिए सभी अधिसूचित रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया।

कैबिनेट की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि MSP में यह संशोधन किसानों को उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य समर्थन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है।

रबी फसलों में कुसुम (सैफ्लॉवर) के MSP में सबसे अधिक ₹675 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

इसके बाद रेपसीड एवं सरसों के MSP में ₹413 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। वहीं मसूर के MSP में ₹390 प्रति क्विंटल, जौ में ₹136 प्रति क्विंटल, चना में ₹83 प्रति क्विंटल तथा गेहूं में ₹25 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

सरकार ने कहा कि संशोधित MSP वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई उस घोषणा के अनुरूप हैं, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित करने का निर्णय लिया गया था।

दिल्ली में ₹1,789 करोड़ की ITMS परियोजना को मंजूरी

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में CCEA ने दिल्ली पुलिस के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) परियोजना को मंजूरी प्रदान की है।

इस परियोजना की अनुमानित लागत करों सहित ₹1,789 करोड़ से अधिक होगी।

परियोजना को 42 चिन्हित यातायात गलियारों में तीन चरणों में लागू किया जाएगा। इसका क्रियान्वयन 24 महीनों में पूरा किया जाएगा, जिसके बाद पांच वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था रहेगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की सड़कों पर लगभग 71 लाख सक्रिय पंजीकृत वाहन हैं।

वाहनों की संख्या में वृद्धि सड़क अवसंरचना के विस्तार की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है, जबकि वर्तमान यातायात प्रबंधन काफी हद तक निर्धारित सिग्नल टाइमिंग और मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भर है।

सरकार का कहना है कि ITMS परियोजना वास्तविक समय के यातायात डेटा के आधार पर ट्रैफिक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगी, जिससे सड़क क्षमता का बेहतर उपयोग, यातायात प्रवाह में सुधार और जाम में कमी लाने में मदद मिलेगी।

PM-DHARA योजना को भी कैबिनेट की मंजूरी

कैबिनेट ने PM-DHARA (PM-Developing Harmonized and Accelerated Renewable-energy Access) योजना को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य राज्यों के भीतर विद्युत पारेषण अवसंरचना को मजबूत करना तथा विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा के पारेषण को सुगम बनाना है।

योजना के तहत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन स्थलों अथवा अन्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों पर 50 गीगावाट-घंटा (GWh) क्षमता वाले बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार के अनुसार, यह पहल नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमित उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने, पारेषण नेटवर्क पर दबाव कम करने, पीक आवर्स में बिजली कटौती की आवश्यकता घटाने और गैर-सौर घंटों के दौरान बिजली की मांग पूरी करने में सहायक होगी।

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्रिड एकीकरण तथा बिजली निकासी (पावर एवैक्यूएशन) क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।