भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने संबोधन के दौरान तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन द्वारा जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणियों को सख्ती से खारिज करते हुए दोहराया है कि यह मुद्दा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा एक आंतरिक विषय है।
मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस क्षेत्र से जुड़े मामलों पर किसी भी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार या हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
हालिया IBSA बयान से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में जायसवाल ने बताया कि भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मुलाकात की थी। बैठक के बाद तीनों देशों ने विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर अपने साझा दृष्टिकोण को दर्शाते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया।
उन्होंने कहा कि इस बयान में आर्थिक, विकासात्मक और राजनीतिक महत्व के अनेक विषयों को शामिल किया गया था। फिलिस्तीन मुद्दे पर जायसवाल ने भारत की लंबे समय से चली आ रही उस नीति को दोहराया, जिसमें इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों के शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित सह-अस्तित्व के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का समर्थन किया जाता है।
न्यूज़गेट द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में, जो विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की अमेरिका यात्रा के दौरान आतंकवाद पर की गई टिप्पणियों से संबंधित था, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मंत्री ने सीमा-पार आतंकवाद को वैश्विक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बताया था और इस खतरे से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया था।
संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ संबंधी रिपोर्टों पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में जायसवाल ने बताया कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने प्रस्तावित Sanctioning Russia and Iran Act (SIRA) को लेकर भारत की चिंताओं से भी अमेरिकी पक्ष को अवगत कराया, विशेष रूप से भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभावों के संदर्भ में।
फारस की खाड़ी में समुद्री गतिविधियों के संबंध में जानकारी देते हुए जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में इस क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले छह वाणिज्यिक जहाज संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा, भारत के लिए माल लेकर चल रहे छह विदेशी ध्वज वाले जहाज भी क्षेत्र में मौजूद हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इन जहाजों पर लगभग 163 भारतीय नाविक तैनात हैं। इसके अतिरिक्त, व्यापक क्षेत्रीय समुद्री जलक्षेत्र में संचालित विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक सेवा दे रहे हैं।







