ग्लोबल स्टेज पर दिए गए सबसे कड़े और स्पष्ट बयानों में से एक में भारत ने पाकिस्तान को “आतंकवाद का सिलसिलेवार पोषक और प्रयोगकर्ता” करार दिया है।
भारतीय समयानुसार आधी रात से कुछ पहले न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने की पाकिस्तान की कोशिशों को सख्ती से खारिज किया। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के प्रति नई दिल्ली की अडिग प्रतिबद्धता को दोहराया।
जयशंकर का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा एक दिन पहले संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में दिए गए वक्तव्य के जवाब में आया। उन्होंने इस्लामाबाद पर आतंकवाद की वास्तविकता को गलत तरीके से पेश करने और उसके दुष्परिणामों से बचने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
जयशंकर ने कहा, “कल आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने इस सभा के सामने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया। आतंकवाद को सामान्य ठहराने और उसके परिणामों से बच निकलने के लिए तर्क दिए गए। यह स्वीकार नहीं किया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा का अधिकार भारत हर हाल में इस्तेमाल करेगा। आतंकवाद और मित्रता या सद्भावना साथ-साथ नहीं चल सकते। ऐसे किसी भी समझौते या रिश्ते पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अपनी राह बदलनी होगी।”
वैश्विक आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ भारत के कड़े रुख को रेखांकित करते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राज्य प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसे नेटवर्कों को बिना किसी अपवाद के समाप्त करना चाहिए।
पाकिस्तान या उसके प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को वैध ठहराने या उसका समर्थन करने वालों को जवाबदेही से बचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने आतंकवादी खतरों के खिलाफ भारत के आत्मरक्षा के संप्रभु अधिकार को भी दोहराया।
जयशंकर ने कहा, “शांति के लिए सबसे लगातार बने रहने वाले खतरों में आतंकवाद एक बड़ी चुनौती रहा है। जब इसे किसी राज्य का समर्थन प्राप्त हो और इसका उद्देश्य सीमा पार गतिविधियों को बढ़ावा देना हो, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ हमारी शून्य-सहनशीलता की नीति में किसी प्रकार की नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। विशेष रूप से इसके वित्तीय नेटवर्कों को उजागर करना और उन पर प्रभावी कार्रवाई करना आवश्यक है।”
विदेश मंत्री की यह टिप्पणी आतंकवाद के प्रति भारत के उस स्पष्ट और दृढ़ रुख को दर्शाती है, जिसके अनुसार आतंकवाद, चाहे उसका स्रोत या औचित्य कुछ भी हो, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के सामने सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है और उससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एकजुट कार्रवाई की आवश्यकता है।







